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Mayapur Chandrodaya Temple and Vedic Planetarium, Mayapur
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About Mayapur Chandrodaya Temple and Vedic Planetarium, Mayapur

The Mayapur Chandrodaya Temple, part of the grand Vedic Planetarium, is a remarkable spiritual and architectural marvel located in Mayapur, West Bengal. This sacred site holds immense significance as it is the birthplace of Sri Chaitanya Mahaprabhu, the revered saint and proponent of the Gaudiya-Vaishnava tradition. Designed to be one of the largest temples in the world, this magnificent structure is dedicated to preserving and spreading Vedic wisdom, spirituality, and culture on a global scale.

The temple complex spans an impressive 425,000 square feet (39,500 m²) with a towering height of 340 feet (100 m), making it a prominent landmark in the region. The grand structure is surrounded by a beautifully designed campus that includes lodges, residential quarters, educational institutions, shops, and serene gardens for devotees and visitors.

One of the highlights of this temple is the Vedic Planetarium, an attraction that presents ancient Vedic cosmology in a visually captivating manner. The planetarium showcases the Vedic understanding of the universe, as described in the Srimad Bhagavatam, offering an alternative perspective to modern astronomy. The exhibits within the planetarium illustrate various aspects of ancient sciences, arts, and spiritual traditions, allowing visitors to explore the depth of Vedic knowledge.

The ambitious project is funded through generous contributions from devotees and patrons worldwide. Among the major contributors is Alfred B. Ford, the great-grandson of Henry Ford, who has played a key role in supporting the vision of this grand temple. The temple stands as a beacon of spiritual enlightenment, devotion, and cultural heritage, attracting pilgrims and scholars from around the world.

With its intricate architecture, deep-rooted spiritual significance, and emphasis on Vedic teachings, the Mayapur Chandrodaya Temple and Vedic Planetarium serves as a major hub for those seeking spiritual knowledge, divine blessings, and a connection to ancient wisdom. Visitors can immerse themselves in the vibrant devotional atmosphere, participate in kirtans (spiritual chants), lectures, and various cultural activities, making their journey to Mayapur a truly transformative experience.


मायापुर चंद्रोदया मंदिर और वैदिक तारामंडल, मायापुर

मायापुर चंद्रोदया मंदिर, भव्य वैदिक तारामंडल का एक महत्वपूर्ण भाग है और इसे दुनिया के सबसे भव्य मंदिरों में से एक के रूप में विकसित किया गया है। यह पश्चिम बंगाल के मायापुर में स्थित है, जो श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। श्री चैतन्य महाप्रभु ने गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रचार किया और इस मंदिर का उद्देश्य उनकी शिक्षाओं को संजोकर वैदिक ज्ञान, आध्यात्मिकता और संस्कृति का प्रचार करना है।

यह विशाल मंदिर परिसर 4,25,000 वर्ग फुट (39,500 वर्ग मीटर) में फैला हुआ है और इसकी ऊँचाई 340 फीट (100 मीटर) है। इसकी भव्यता इसे क्षेत्र का एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाती है। मंदिर के चारों ओर आवासीय परिसर, अतिथि गृह, शिक्षण संस्थान, दुकानों और सुंदर उद्यानों का निर्माण किया गया है, जिससे भक्तों और आगंतुकों को एक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान किया जा सके।

मंदिर की एक प्रमुख विशेषता वैदिक तारामंडल है, जो प्राचीन वैदिक खगोलशास्त्र को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करता है। इसमें श्रीमद्भागवत में वर्णित ब्रह्मांड की संरचना को चित्रों, प्रदर्शनों और मॉडलों के माध्यम से समझाया गया है। इस तारामंडल में प्रदर्शित सामग्री प्राचीन भारतीय विज्ञान, कला और संस्कृति से जुड़ी हुई है, जिससे आगंतुकों को वैदिक ज्ञान की गहराई को जानने का अवसर मिलता है।

इस भव्य परियोजना को दुनिया भर के भक्तों और सहयोगियों के आर्थिक सहयोग से निर्मित किया गया है। हेनरी फोर्ड के परपोते अल्फ्रेड बी. फोर्ड इस मंदिर के प्रमुख सहयोगियों में से एक हैं, जिन्होंने इस दिव्य परियोजना को मूर्त रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा को भी जीवंत बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

इस मंदिर में दर्शन करने वाले भक्त भजन-कीर्तन, प्रवचन, और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर एक आध्यात्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इसकी भव्यता, गहन आध्यात्मिक महत्व और वैदिक शिक्षाओं पर केंद्रित वातावरण इसे एक अद्वितीय तीर्थ स्थल बनाते हैं, जहाँ हर भक्त को शांति और दिव्यता की अनुभूति होती है।

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